प्रो. पुरोहित ने कहा कि बीते वर्ष किए गए आर्थिक सुधारों—जैसे आयकर स्लैब में परिवर्तन एवं कर छूट के दायरे का विस्तार, जीएसटी 2.0 के अंतर्गत टैरिफ में बदलाव कर दरों में कटौती, बहुप्रतीक्षित चार श्रम संहिताओं का क्रियान्वयन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए मनरेगा के दायरे का विस्तार कर गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (जी-राम-जी) जैसे कदम—रोजगार सृजन और ग्राम स्वराज की स्थापना की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होंगे। ये सभी प्रयास विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होंगे।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ एवं चौधरी बंशी लाल विश्वविद्यालय, भिवानी (हरियाणा) के आचार्य प्रो. एसके सिन्हा ने कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए अनावश्यक टैरिफ के बावजूद भारत का निर्यात निरंतर बढ़ रहा है। इससे स्पष्ट है कि भारत व्यापार और औद्योगीकरण के क्षेत्र में एक विश्वसनीय राष्ट्र के रूप में उभरा है। कार्यशाला में अतिथियों का स्वागत डॉ. आशुतोष कुमार सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुशील कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया। मंच संचालन डॉ. राकेश कुमार उपाध्याय ने किया। इस अवसर पर डॉ. निशा पांडे, डॉ. सुशील कुमार सिंह एवं प्रिंस सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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