Jaunpur News: हर बच्चे की रक्षा के दावे पर सवाल, पोलियो दिवस पर लापरवाही उजागर

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  • दो बूंद जिन्दगी की अभियान पर भारी अव्यवस्था, पोलियो ड्राप के इंतजार में लौटे बच्चे

बीके सिंह/संजय सिंह

सिरकोनी, जौनपुर। राष्ट्रीय पोलियो दिवस पर स्थानीय ब्लाक अन्तर्गत कुछ बूथों पर घोर लापरवाही देखने को मिली। निर्धारित समय पर पोलियो की खुराक (ड्रॉप) न पहुंचने के कारण 0 से 5 वर्ष तक के दर्जनों बच्चे बिना दवा पिए ही वापस लौटने को मजबूर हो गये।

जानकारी के अनुसार पोलियो अभियान के तहत सभी जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मी एवं कर्मचारी सुबह करीब 9 बजे ही अपने बूथों पर पहुंच गए थे लेकिन दोपहर 1 बजे तक पोलियो कैरियर (दवा वाहन) मौके पर नहीं पहुंच सका। इस कारण बच्चों और अभिभावकों को घंटों इंतजार करना पड़ा, फिर भी दवा उपलब्ध नहीं हो सकी।

इस संबंध में जब संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदारों से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठा। इससे यह आभास हुआ कि जिम्मेदार जवाब देने से बचते नजर आये। स्थानीय लोगों ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय पर दवा नहीं पहुंचाई जा सकती तो अभियान के उद्देश्य पर ही प्रश्नचिह्न लग जाता है।

गौरतलब है कि पल्स पोलियो अभियान का मुख्य उद्देश्य 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाकर भारत को पूरी तरह पोलियो मुक्त बनाना है। इसी उद्देश्य को लेकर हर वर्ष देशभर में स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन, स्वयंसेवी संगठन और आमजन मिलकर इस महाअभियान को सफल बनाने का प्रयास करते हैं।

विश्व पोलियो दिवस 2025 की थीम रही— "पोलियो का अभी अंत करें: हर बच्चे की रक्षा करें", जो इस बात पर जोर देती है कि पोलियो उन्मूलन के अंतिम चरण में किसी भी तरह की चूक या लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

पोलियो अभियान 2025 के अंतर्गत अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर महीनों में देश भर में बूथ स्तर के साथ घर-घर जाकर टीकाकरण, मोबाइल टीमें और ट्रांजिट बूथ के माध्यम से बच्चों तक पहुंचने की योजना बनाई गई थी। "दो बूंद ज़िंदगी की" जैसे प्रभावी नारों के जरिए अभिभावकों को जागरूक किया गया।

इसके बावजूद जौनपुर के कुछ क्षेत्रों में सामने आई यह अव्यवस्था न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी प्रतीत होती है। स्थानीय नागरिकों ने उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो और कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे।



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