- भरत का चरित्र भक्ति, मर्यादा एवं भ्रातृ-प्रेम का उज्ज्वल उदाहरण
भदोही। सातवें दिन की कथा का प्रारंभ श्री हनुमान जी की भक्ति की चर्चा करते हुए भक्ति के प्रकार बताते हुए ब्यासपीठ से भाई श्री ने बताया कि भक्त चार प्रकार से होती है तामस भक्त, राजस भक्त, सात्विक भक्त, निर्गुण भक्त तथा इसकी विस्तार से चर्चा किया। भगवान शिव के डमरू से सूत्र निकले। 14 वर्ष ने राम को श्रीराम अर्थात मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बना दिया। जीवन वही अच्छा है जो भगवत प्राप्ति में लगे आपके विचार ही आपका भोजन व्यवहार बनाते हैं। श्रीराम ने जीवन भर मर्यादा का पालन किया।
अगर मुझे पाना है तो मेरे जैसे कर्म करो, त्याग करो, सेवा करो, केवट के जीवन में दर्शन है। प्रदर्शन नहीं, वह सच्चा भक्त है। वह भगवान के मर्म को जानता है।भोला केवट कहता है वह आपके पैर के छूने से पत्थर स्त्री बन गई। अगर आपने मेरी नाव को छुआ तो यह भी स्त्री बन जाएगी तो मेरा क्या होगा, इस तरह के अद्भुत श्रीराम और केवट प्रसंग का वर्णन व्यास पीठ से श्री महाराज जी ने कहा कि कथा को आगे बढ़ते हुए भाई श्री बताते हैं कि कि भगवान कहते हैं। भाव का भूखा हूं। मै मेरी नैया में लक्ष्मण, श्रीराम गंगा मैइया धीरे बहो। मेरी नैया है बीच मझधार गंगा मईया धीरे बहो। भजन के प्रस्तुति पर भक्तगण झूम उठे।
भरत के चरित्र का जीवंत चित्रण करते हुए शिवानंद महाराज ने कहा कि भरत श्रीराम कथा के ऐसे आदर्श पात्र हैं जिनका चरित्र त्याग, भक्ति, मर्यादा और भ्रातृ-प्रेम का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। वे केवल अयोध्या के राजकुमार नहीं, बल्कि धर्म, नीति और आदर्श शासन की सजीव प्रतिमा हैं।
एक से बढ़कर एक उदाहरण कथा को जीवंत बना रहे थे। कथा पंडाल में डॉ. सजीवन मिश्र, योगाचार्य विजय श्रीवास्तव, शरद शर्मा, रामेश्वर राय, विनय गुप्ता एक्सीलेंट कारपेट, भूपेश पांडेय, हरीश सिंह, विनीत बरनवाल, आरती सिंह, गोपीनाथ खत्री, सुभाष मौर्य, डॉ. एसपी गुप्ता समेत हजारों भक्तजन उपस्थित रहे।
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