- डा. कवि कृष्ण कुमार और डा. अशोक खेड़ला को मिला चौपाल महारत्न सम्मान
- कवियों ने वीर, श्रृंगार और हास्य रस की रचनाओं से लूटी वाहवाही
विजय जायसवाल
दौसा, मध्य प्रदेश। राष्ट्रीय कवि चौपाल दौसा के तत्वावधान में 70वीं मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन अपेक्स महाविद्यालय लालसोट रोड दौसा में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुशील शर्मा पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी रहे। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार गोपाल टेलर ने किया। विशिष्ट अतिथि जगदीश प्रसाद बैरवा संयुक्त परिवहन आयुक्त जयपुर, एडवोकेट रमेश चन्द सैनी निदेशक अपेक्स महाविद्यालय रहे।
कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा वीणापाणी माँ शारदे के चित्र के समक्ष माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। सरस्वती वंदना का सुमधुर गायन डॉ. बृजमोहन मीणा ने प्रस्तुत किया जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। मुख्यातिथि सुशील शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय कवि चौपाल संस्था द्वारा साहित्य के क्षेत्र में प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया जा रहा है। अध्यक्षीय उद्बोधन में गोपाल टेलर ने साहित्य की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए सभी रचनाकारों का उत्साहवर्धन किया।
गोष्ठी में राष्ट्रीय कवि चौपाल के अध्यक्ष कवि कृष्ण कुमार सैनी एवं संस्था के सलाहकार तथा प्रख्यात मिमिक्री कलाकार अशोक खेड़ला को डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त होने के उपलक्ष्य में “चौपाल महारत्न सम्मान–2025” से सम्मानित किया गया। काव्य गोष्ठी में शिवचरण भंडाना ने “लक्ष्मी का मन चंचल है…”, रामबाबू ज्योति ने “नाम परीक्षा का सुनते ही…”, तेज प्रकाश तेजस्वी ने “मैं ही किश्ती मैं ही किनारा था…”, प्रजापति कवि दिनेश तूफानी ने “मुझको प्रिय वह बृजभान किशोरी” छंद, बुद्धिप्रकाश महावर ने श्रृंगार रस की कविता सुनाई....., सुनीता वर्मा ने “जीवन पर अधिकार सभी का…”, पेंटर सूरज सिंह महावर ने “हाँ वो बहन है मेरी…”, केदार प्रसाद आभानेरी ने “लक्ष्य ध्यान रखे मनोयोग से…” तथा कैलाश दुबे ने “बना लो गीता जीवन गीत…” , अनोखी सरगम ने “तू मेरे दिल में रहता है…”, राजेन्द्र बैरवा ने “तेरा काजल मुझे पागल…”, प्रेरणापुंज अशोक कुवाल ने तनाव मुक्त जीवन पर रचना सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया।
कार्यक्रम में महेश पारीक, सरदार सिंह गुर्जर, अनिल सैनी, नरेन्द्र भंडारी, गजेन्द्र शर्मा, विनोद गौड़, रामकरण मीना थुमडी, संदीप छीपा सहित अन्य कवियों ने भी बेहतरीन प्रस्तुति दी। गोष्ठी में प्रस्तुत कविताएँ सामाजिक, राष्ट्रीय, हास्य-व्यंग्य एवं शृंगार रस से ओत-प्रोत रही जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा। सभागार देर तक तालियों की गूंज से गूंजता रहा और साहित्यिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। मंच संचालन संस्था महासचिव कवि कैलाश सुमा ने किया। अंत में कार्यक्रम संयोजक डॉ. कवि कृष्ण कुमार सैनी ने समस्त अतिथियों एवं साहित्यकारों का आभार जताया।
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