- दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शव को निकाला गया नदी से बाहर
- पुलिसिया मुस्तैदी के बीच घटी घटना खड़ा कर रहा है सवालिया निशान
अरविन्द यादव
केराकत, जौनपुर। स्थानीय क्षेत्र के सरौनी पूरब पट्टी गांव में आस्था और श्रद्धा के बीच छठ महापर्व की मंगलवार की सुबह दर्दनाक हादसा हो गया हादसा उस समय हुआ जब व्रती महिलाए उगते सूर्य को अर्घ दे रही थी। इसी बीच युवक नदी के उस पार से वापस लौट रहा था और जैसे ही बीच नदी में पहुंचा सांस फूलने लगी और डूबकर मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर प्रशासन की टीम गोताखोरों की मदद से दो घंटे बाद शव को नदी से बरामद किया। जिसके बाद शव को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। स्वजनों द्वारा पोस्टमार्टम से इनकार करने के बाद पुलिस ने शव को पंचनामा कर शव कों उन्हें सौंप दिया।
बारहवीं का छात्र था मृतक
गौरतलब हो कि सरौनी गांव के टड़िया घाट पर आयोजित छठ पूजा में अरविन्द यादव 20वर्ष उर्फ गोलू पुत्र रामदुलार यादव निवासी सरौनी पूरब पट्टी में पूजा देखने के लिए गया था। कुछ देर बाद वह नदी में तैरने चला गया। इस दौरान नदी को तैरकर एक चक्कर लगाकर वापस आ गया और पुनः दूसरा चक्कर लगाने के लिये गया और वापस लौटते समय उसकी सांस फूल गयी और नदी में डूब गया। उसको नदी में डूबते देख लोगों में खलबली मच गयी और उसे बचाने के लिए आवाज़ लगाने लगे लेकिन वह डूब गया। जिसके बाद ग्रामीणों ने उसे ढूंढने के लिये काफ़ी प्रयास किया लेकिन वह नहीं मिला। मृतक युवक इंटर कालेज में बारहवीं का छात्र था।
आरोप: पुलिस मौजूद होती तो शायद नहीं हो पाता हादसा
घटना की सूचना मिलने पर एसडीएम शैलेन्द्र कुमार, सीओ अजीत कुमार रजक, थाना प्रभारी निरीक्षक दीपेन्द्र सिंह मय फोर्स घटना स्थल पर पहुंच गये। अग्निशमन विभाग भी मौके पर पहुंचा। गोताखोरों की मदद से दो घंटे कि मशक्कत के बाद युवक को नदी से बाहर निकाल कर उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पंहुचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कुछ लोग यह कहते भी सुने गये की पुलिस की लापरवाही के चलते ही अरविंद गहरे नदी में दो बार गया। अरविंद को नदी में आते और जाते अगर कोई पुलिस वाला उसे रोकता तो आज शायद वह जीवित होता।
चीख पुकार से गूंज उठा घाट
नदी में डूबे युवक की मां दहाड़े मारकर छठी मैया से गुहार करती रही कि वह हमरे बेटवा के लौटा दी। मां के करुण क्रंदन सुन घाट पर मौजूद जनसैलाब की भर आई आंखें। परिजनों की चीख पुकार से समूचा गांव ही नहीं बल्कि क्षेत्र गमगीन हो गया।
दुर्घटना से बचने के लिए प्रशासन द्वारा किए जाते हैं पुख्ता इंतजाम
छठ महापर्व को देखते हुए स्थानीय प्रशासन द्वारा पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं श्रद्धालुओं को कोई परेशानी ना हो इसके लिए प्रशासन द्वारा गहरे घाटों की पहचान करके वहां बरकटिंग की जाती है,ताकि श्रद्धालुओं को उन क्षेत्रों में जाने से रोका जा सके साथ ही सुरक्षाकर्मी नाव के जरिए पानी में गस्त लगाते हैं ताकि वे पानी में मौजूद लोगों पर नजर रख सके और उन्हें सुरक्षित सीमा के अंदर रहने की चेतावनी दे सके। इसके बावजूद भी एक युवक नदी के उस पार से इस पार तैरते हुए आता और जाता है पर मौजूद सुरक्षाकर्मी की नजर ना पड़ना सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
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