जौनपुर। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की जौनपुर शाखा इस समय विवादों, अनियमितताओं के साथ भ्रष्टाचार एवं उत्पीड़न का केन्द्र बना है। सहायक क्षेत्रीय प्रबन्धक ममता दुबे पर भ्रष्टाचार, कर्मचारियों के उत्पीड़न, फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने जैसे गम्भीर आरोप लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि शासन और उच्चाधिकारियों से बार-बार शिकायत करने के बावजूद भी अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। इससे जहां विभाग की कार्यप्रणाली पर गम्भीर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं भ्रष्टाचार एवं उत्पीड़न करने वाले का मन और भी बढ़ता जा रहा है जिस पर अंकुश लगाने के लिये जनहित में अति आवश्यक है।
भ्रष्टाचार एवं प्रताड़ना का खेल
सूत्रों एवं चर्चाओं की मानें तो आरोप है कि एआरएम ममता दुबे द्वारा चालक-परिचालकों सहित विभागीय कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करना और उनसे मोटी रकम की मांग करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ लोगों ने बताया कि जो कर्मचारी उनकी मांगों को पूरा नहीं करते तो उन्हें अश्लील भाषा का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं, फर्जी आधारों पर निलम्बन या स्थानान्तरण की बात भी कही जाती है जिससे वह डरे—सहमे रहते हैं।
आत्महत्या का मामला
बता दें कि संविदा परिचालक अभिषेक सिंह ने गत दिवस रोडवेज परिसर में ही जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। आरोप है कि बहाली के नाम पर मोटी रकम वसूलने के बाद भी उन्हें इतना प्रताड़ित किया गया कि उन्होंने यह खौफनाक कदम उठा लिया।
रिश्वत का सिंडिकेट
विभागीय शिकायत के अनुसार कनिष्ठ लिपिक प्रदीप श्रीवास्तव पर आरोप है कि वह एआरएम महोदया के व्यक्तिगत सिस्टम से काम करते थे। हाल ही में झुल्लूर राम नामक चालक से बस अलॉटमेंट के नाम पर रिश्वत लेते समय एंटी करप्शन टीम ने कनिष्ठ लिपिक प्रदीप श्रीवास्तव को रंगे हाथों पकड़ा था।
धनउगाही के लिये निलम्बन एवं तबादला
विभागीय सूत्रों के अनुसार रविशंकर, आदिल, रविन्द्र पाण्डेय जैसे कई कर्मचारियों को गलत तथ्यों के आधार पर निलम्बन के नाम पर धनउगाही की कोशिश की गयी। शर्त न मानने पर कुछ लोगों का स्थानान्तरण भी कर दिया गया।
शैक्षणिक दस्तावेजों पर गहराता संदेह
शिकायतकर्ताओं के अनुसार एआरएम ममता दुबे के शैक्षणिक प्रमाण पत्र फर्जी हैं। इस सम्बन्ध में कर्मचारियों ने हलफनामे के साथ शासन को पत्र भी लिखा है लेकिन "दूध का दूध और पानी का पानी" करने के लिये अभी तक कोई उच्चस्तरीय जांच शुरू नहीं की गयी है।
जिलाधिकारी के निर्देश बेअसर?
जिलाधिकारी डा. दिनेश चन्द्र जहां सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में 'ड्रिंक एण्ड ड्राइव' रोकने और यातायात व्यवस्था सुधारने के कड़े निर्देश दिये, वहीं रोडवेज डिपो के भीतर व्याप्त प्रशासनिक अराजकता उनके निर्देशों को ठेंगा दिखा रही है जबकि शासन की स्पष्ट मंशा है कि भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कसी जाय लेकिन जौनपुर डिपो में स्थिति इसके विपरीत नजर आती है।
एआरएम के खिलाफ जांच की फाइलें क्यों दबी हैं?
कुल मिलाकर यहां एक प्रश्न पहाड़ जैसा खड़ा होकर जोर—जोर से चिल्ला रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में एआरएम ममता दुबे के खिलाफ जांच की फाइलें दबी हुई हैं? रोडवेज परिसर में हुई आत्महत्या के मामले में पीड़ित परिवार को अभी तक न्याय क्यों नहीं मिला? मुख्यमंत्री के 'जीरो टॉलरेंस' नीति के बावजूद फर्जी डिग्री के आरोपों की जांच क्यों नहीं हो रही है?
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