जौनपुर: पति की लंबी आयु के लिए महिलाओं ने किया वट सावित्री की पूजा | #AAPKIUMMID - उम्मीद

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Monday, June 3, 2019

जौनपुर: पति की लंबी आयु के लिए महिलाओं ने किया वट सावित्री की पूजा | #AAPKIUMMID

जौनपुर। जिले में सोमवार को वट सावित्री पूजा का पर्व धूमधाम से मनाया गया। शहर से लेकर ग्रांमीणांचल इलाकों में महिलाओं ने बरगद के पेड़ के पास पहुंचकर पूजन किया। बरगद के वृक्ष के चारों ओर सूत के धागे के साथ परिक्रमा करते हुए महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु की कामना किया। सप्ताह का पहला दिन सोमवार होने की वजह से महिलाएं वट वृक्ष की पूजा के बाद मंदिरों में भी दर्शन पूजन किया। वहीं मड़ियाहूं विधायक डा. लीना तिवारी ने वट सावित्री पर्व पर बरगद के पेड़ के पास पहुंचकर पूजन अर्चन किया।

वट सावित्री पर्व के दिन सुहागिनें पति की दीर्घायु और परिवार की सुख शांति के लिए वट सावित्री की पूजा करती हैं। वट सावित्री व्रत में ‘वट’ और ‘सावित्री’ दोनों का खास महत्व माना गया है। पीपल की तरह वट या बरगद के पेड़ का भी विशेष महत्व है। पुराणों की मानें तो वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का वास है।
वट सावित्री व्रत का महत्व
इस व्रत में बरगद पेड़ के चारों ओर घूमकर रक्षा सूत्र बांधा और आशीर्वाद मांगा। इस अवसर पर सुहागिनों एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। इसके अलावा पुजारी से सत्यवान और सावित्री की कथा सुनती हैं। नवविवाहिता सुहागिनों में पहली बार वट सावित्री पूजा का अलग ही उत्साह रहता है। वट सावित्री के व्रत के दिनबरगद पेड़ के नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा सुनने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
इस व्रत में महिलाएं सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं। वट वृक्ष के नीचे बैठकर ही सावित्री ने अपने पतिव्रत से पति सत्यवान को दोबारा जीवित कर लिया था। दूसरी कथा के अनुसार मार्कण्डेय ऋषि को भगवान शिव के वरदान से वट वृक्ष के पत्ते में पैर का अंगूठा चूसते हुए बाल मुकुंद के दर्शन हुए थे, तभी से वट वृक्ष की पूजा की जाती है। वट वृक्ष की पूजा से घर में सुख-शांति, धनलक्ष्मी का भी वास होता है। वट वृक्ष रोग नाशक भी है। वट का दूध कई बीमारियों से हमारी रक्षा करता है।

ऐसे करें पूजा
वट सावित्री और वट पूर्णिमा की पूजा वट वृक्ष के नीचे होती है। एक बांस की टोकरी में सात तरह के अनाज रखे जाते हैं जिसे कपड़े के दो टुकड़ों से ढक दिया जाता है। एक दूसरी बांस की टोकरी में देवी सावित्री की प्रतिमा रखी जाती है। वट वृक्ष पर महिलायें जल चढ़ाकर कुमकुम, अक्षत चढ़ाती हैं। फिर सूत के धागे से वट वृक्ष को बांधकर उसके सात चक्‍कर लगाती हैं। सभी महिलायें वट सावित्री की कथा सुनती हैं और चने गुड़ का प्रसाद बांटा जाता है।




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