वाराणसी: अमेरिका में भी लगेगा ‘डोमोटेक्स कारपेट फेयर’ | #AAPKIUMMID - उम्मीद

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Tuesday, October 23, 2018

वाराणसी: अमेरिका में भी लगेगा ‘डोमोटेक्स कारपेट फेयर’ | #AAPKIUMMID

  • इंडिया कारपेट एक्स्पों में बड़ी संख्या में पहुंचे विदेशी खरीददार, लक्ष्य से अधिक कारोबार होने की उम्मींदः टम्टा

सुरेश गांधी
वाराणसी। दुनिया में कालीनों का सबसे बड़ा बाजार अमेरिका में भी अब जर्मनी के हैनोवर की तर्ज पर डोमोटेक्स कारपेट फेयर का आयोजन किया जायेगा। इसका आयोजन भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के अधीनस्थ कालीन निर्यात संवर्धन परिषद करेगी। इसमें सरकार का विशेष योगदान होने के साथ साथ निर्यातकों को हर आवश्यक सुविधाएं मुहैया करायी जायेंगी। यह फेयर 28 फरवरी से 3 मार्च तक अमेरिका के एटलांटा में होगा। स्टाल की बुकिंग शुरु हो चुकी है। इसकी जानकारी केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री अजय टमटा ने मंगलवार को बड़ालालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में आयोजित इंडिया कारपेट एक्स्पों में भ्रमण के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताई। उन्होंने कहा कि मेले में देशभर के निर्यातको को आमंत्रित किया गया है। इस मेले में निर्यातको को अपने बेहतरीन कालीनों का कलेक्शन प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा।

श्री टमटा ने कहा कि अमेरिका में भारतीय कालीनों का सबसे बड़ा बाजार है। लेकिन वहां भारतीय निर्यातकों की पहुंच उतनी नहीं हो पाती जितनी होनी चाहिए। कालीन उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अब केंद्र सरकार व भारतीय कालीन संवर्द्धन परिषद (सीईपीसी) डोमोटेक्स का आयोजन करेगी। इससे भारतीय कालीन कारोबारियों का भाग लेने का मौका मिलेगा। देखा जाय तो कालीन कारोबार में यूपी का 65 फीसदी योगदान है। इसमें अकेले भदोही, मिर्जापुर से 55 से 60 फीसदी तक कालीन निर्यात होता है। इस कारण पूर्वांचल के कालीन उद्योग व इससे जुड़े लोगों को अमेरिका में होने वाले डोमोटकक्स से काफी लाभ होगा।
श्री टमटा ने कहा कि मेले में भ्रमण के दौरान निर्यातकों ने बताया कि इस बार अन्य सालों की तुलना में अच्छी पूछ परख व आर्डर मिले हैं। जहां तक मेले में विदेशी खरदारों के पहुंचने का सवाल है तो 300 के मुकाबले 348 बॉयर आएं हैं। मेले में 300 करोड़ के कारोबार का लक्ष्य था, जिसे पूरा कर लिया गया हैं। सीइपीसी चेयरमैन महाबीर शर्मा ने बताया कि भारतीय कालीनों का सबसे बड़ा खरीदार अमेरिका है। कुल कारोबार का 35 फीसदी बाजार अमेरिका में है। सभी भारतीय कालीन निर्यातक अमेरिका के उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए उत्पाद तैयार करते हैं अमेरिका में दो से तीन साल में कारोबार को 35 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी करने का लक्ष्य है। ग्लोबल मंदी का असर भले ही अन्य कालीन बाजारों पर पड़ा हो लेकिन अमेरिकी डालर ने भारतीय रुपये के सापेक्ष हमेशा मजबूती बनाए रखा। कालीनों का सबसे बड़ा आयातक देश होने का रेकार्ड रखने वाले अमेरिका ने वर्ष 2017-18 के निर्यात में वृद्धि दर्ज कराई है। रुपये की तुलना में डालर मजबूत होने से निर्यातकों को भारी लाभ हुआ है।
कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि उन्हें खुशी है कि सीइपीसी भारतीय बुनकरों को प्रोत्साहित करने के लिए साल में साल में दो बार कारपेट एक्स्पों का आयोजन करती है। हर साल एक्स्पों बड़ी मात्रा में न सिर्फ उद्यमियों को कारोबार मुहैया कराता है, बल्कि विदेशी ग्राहकों को भी आकर्षित करता है। इसकी बड़ी वजह है कि भारतीय उद्यमियों को उत्पाद हाथ से बुनी हुई होती है। जबकि कुछ को छोड़ दे तो बाकि के देशों की उत्पाद मशीनमेड होता है। हाथ से बुनी हुई कालीने ही विदेशी खरीददारों के आकर्षण का मुख्य केन्द्र है।
उन्हें खुशी है कि भारत सरकार के तत्वावधान में भारतीय हस्त निर्मित कालीनों की सांस्कृतिक विरासत तथा बुनाई कौशल को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। शीघ्र ही कालीन निर्माताओं को विदेशों में भी व्यापार कर में छूट मिल सकेगी। इसके अलावा जल्द ही जिन राज्यों के इलाकों में सर्वाधिक कालीन इक्सपोर्ट व बिनकारी होती है, वहां मूलभूत व आधारभूत सुविधाएं सरकार मुहैया करायेगी। कारपेट एक्सपो में नए रंगो एवं डिजाइनों से तैैयार किए गए कालीनों की प्रदर्शनी लगाई गयी है। सीनियर सदस्य उमेश गुप्ता ने कहा, इंडिया कारपेट एक्सपो एशिया में हस्तनिर्मित कालीनों के सबसे बड़े मेलों में से एक है जहां एक ही छत के नीचे हाथ से बने कालीनों और गलीचों की व्यापक रेंज प्रस्तुत की जाती है। 348 से ज्यादा प्रदर्शकों की भागीदारी के साथ यह दुनिया भर में हस्तनिर्मित गलीचों के लिए लोकप्रिय गंतव्य बन गया है। इस मौके पर प्रथम उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह, ओंकारनाथ मिश्रा, अब्दुल रब अंसारी समेत कई सदस्य मौजूद थे।



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