ग्रामीण विद्युत सप्लाई से नहीं चल पायेगी सीएनसी, रिबोट आदि जैसी मशीनें
अजय पाण्डेय
जौनपुर। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान को जहाँ प्रदेश एवं केन्द्र सरकार द्वारा अनेकों प्रकार की तकनीकी शिक्षा का विस्तार करने के लिये कई प्रकार से सहयोग कर रही है परन्तु वहीं यदि देखा जाए तो करोड़ों की लागत की मशीनें राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में टाटा सहित अनेकों कम्पनियों के अनुदान से लगाई जा रही हैं और लगाई भी गई है। जो आज के समय में उन ट्रेडों की शिक्षा छात्रों को नहीं मिल रही है बल्कि मशीनें धूल फांक रही है।
बताते चलें कि केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के लिये प्रदेश सरकार विद्युत् की उचित व्यवस्था न कर पाने अक्षम है इसलिये वहीं मशीनें धूल फांकती नजर आती तो दूसरी और अनुभवी अनुदेशक ना होने के कारण छात्रों को सही शिक्षा, सही प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम का अनुभव नहीं हो पा रहा है। जिसके ऊपर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। अवलोकन करने पर जौनपुर में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान तीन हैं अपितु तीनों में अनुदेशक का सही चयन नहीं होने के कारण छात्रों को सही शिक्षा और मशीनों का उपयोग प्रयोगात्मक कार्य नहीं कराया जा रहा है। इस पर सरकार को अपनी सक्रियता बरतनी चाहिए। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर आईटीआई संस्थानों के माध्यम से युवाओं को तकनीकी रूप से कुशल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य और योजनाओं का संचालन भी करती है।
वहीं कौशल विकास विभाग राज्य के तकनीकी प्रशिक्षण और आईटीआई संस्थानों के माध्यम से भी युवाओं को तकनीकी रूप से कुशल बनाने के लिये कई महत्वपूर्ण कार्य और योजनाओं का संचालन कर रही है। पाठ्यक्रम का निर्धारण प्रशिक्षण महानिदेशालय द्वारा पूरे देश के लिए राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम तैयार किये जाते हैं। केन्द्र सरकार के माध्यम से अखिल भारतीय स्तर पर परीक्षाएं आयोजित करायी जाती है और राष्ट्रीय स्तर पर मान्य प्रमाण पत्र भी जारी करती है। केन्द्र सरकार द्वारा आईटीआई अपग्रेडेशन और नेशनल सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस की स्थापना जैसी योजनाएं लागू की जाती हैं, ताकि आधुनिक तकनीकों के अनुरूप छात्रों को प्रशिक्षित किया जा सके। प्रदेश सरकार की संचालन एवं बुनियादी ढांचा राज्य सरकार में सरकारी आईटीआई परिसरों के निर्माण, रखरखाव और प्रबंधन का कार्य करती है। परीक्षा और प्रमाण राज्य स्तर के माध्यम से वोकेशनल कोर्सेज की परीक्षा और प्रमाणन की जिम्मेदारी निभाती है। प्रवेश हेतु राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद के माध्यम से प्रतिवर्ष ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया और काउंसलिंग आयोजित करती है। युवाओं को रोजगार के लिये तैयार करने के लिये यूपी सरकार ने पीपीपी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत निजी कम्पनियों (जैसे टाटा टेक्नोलॉजीज) के सहयोग से राज्य के कई आईटीआई का आधुनिकीकरण कर रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म यूराइज, पोर्टल के जरिये सभी छात्रों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तकनीकी शिक्षा और सीखने का अवसर प्रदान करती है। बताते चलें कि पीपीपी के तहत चलाये जाने वाले ट्रेडों का चयन स्वयं निजी कम्पनियां ही करती है। इस प्रकार की तकनीकी शिक्षा भारत के लिये भविष्य तय करेंगी परन्तु तकनीकी शिक्षा का महत्व व लाभ राष्ट्र को तभी मिलेगा जब छात्र—छात्राओं को सही और उचित एवं अनुभवी अनुदेशकों के देख रेख शिक्षा ग्रहण करेंगे।
राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान उसराव (मड़ियाहूँ), सबरहद (शाहगंज), सिद्दीकपुर जौनपुर के संस्थानों में अनुदेशकों की संख्या कम है जिससे छात्रों को शिक्षा दे सकें, जिससे विद्यार्थियों सहित देश का भविष्य उज्जवल हो सके। परन्तु वही देखा जाए तो लिपिक और वरिष्ठ लिपिक संख्या अधिक है। इस बिन्दु पर निर्देशालय, महानिर्देशालय एवं टाटा जैसी निजी कम्पनियों को अपनी सक्रियता दिखाते हुए विचार कर अनुभवी अनुदेशकों का चयन कर संस्थान के पाठ्यक्रम पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। वहीं अतिरिक्त स्टाफ की समुचित व्यवस्था होनी चाहिये जिससे सरकार के राजस्व का दुरूपयोग न हो सके।
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