जौनपुर। बहुजन समाज पार्टी ने पूर्व पीसीएस अधिकारी रहे वर्तमान सांसद श्याम सिंह यादव को प्रत्याशी बनाया है। शहर स्थित उनके परिवार व रिश्ते में रहने वाले लोगों ने कहा कि जो पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बद्दुआ दे सकता है उसको वोट देना हमारी जमीर नहीं कहता है। यह कह लीजिए यादव बिरादरी में उनके परिवार व रिश्तेदारी के लोग भी उनको वोट देने से कतरा रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने बताया​ कि इण्डिया गठबंधन प्रत्याशी बाबू सिंह कुशवाहा को वोट करेंगे।

श्याम सिंह यादव ने बीते 13 अप्रैल को सपा मुखिया अखिलेश यादव को यह तक लिख दिया कि आपको किसी की बद्दुआ नहीं लेनी चाहिए। श्याम सिंह पिछली बार सपा-बसपा गठबंधन में बसपा के टिकट पर जौनपुर लोकसभा चुनाव जीते थे। इस बार बसपा से अकेले चुनाव लड़ रहे हैं।


श्याम सिंह के पिता स्व. उमाशंकर यादव किसान थे। चाचा दयाशंकर यादव राजनीति से जुड़ हुए थे। वे 40 वर्षों तक मड़ियाहूं के ब्लाक प्रमुख रहे। चचेरे भाई स्व. विरेन्द्र यादव एडवोकेट सपा के जिलाध्यक्ष रहे हैं।

बता दें कि श्याम सिंह यादव मड़ियाहूं क्षेत्र के रानीपट्टी गांव के मूल निवासी हैं। उन्होंने इण्टर तक की पढ़ाई टीडी इण्टर कालेज से किया। इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमएसएसी और एलएलबी किया। 1982 में वे पीसीएस अफसर बने। प्रदेश के विभिन्न जनपदों में एसडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट, एडीएम और नगर विकास आयुक्त पद पर तैनात रहे। श्याम सिंह यादव पढ़ाई के साथ खेल में भी शौक रखते हैं। राईफल शूटिंग में देश का नाम दुनियां में रौशन किया है। श्याम सिंह यादव ने ओलंपिक और राष्ट्रमण्डल खेलों में अपना प्रतिनिधित्व किया है तथा इण्डिया टीम के कोच रहे हैं। वे खेल मंत्री राजवर्धन राठौर के कोच रहे हैं।

इस चुनाव में अब पता चल जायेगा कि कौन इंज्वॉय कर रहा था: सलीम खान
जौनपुर। हाल ही में बसपा के सभी पदों से इस्तीफा देकर सुर्खियों में आये युवा नेता सलीम खान ने गुरूवार को अपने कार्यालय पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि उन्होंने हमेशा बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के बनाये संविधान को मानते हुए अपनी राजनीतिक पारी की शुरूआत की थी और आगे भी वह इसी पर कार्य करते रहेंगे लेकिन बसपा सांसद श्याम सिंह यादव ने जिस तरह से उन पर यह आरोप लगाया कि वह लोभ—लालच के चलते बसपा छोड़कर गये हैं, यह सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि बीते 12 वर्षों में उन्होंने पार्टी में रहकर हमेशा गरीब, बेसहारा, मजलूमों को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ी है और जब उन्होने बसपा की सदस्यता ग्रहण की थी तब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। 2017 व 2022 में भाजपा की सरकार प्रदेश में बनी हुई है। ऐसे में उनका यह बयान हास्यासपद है।

श्री खान ने कहा कि सांसद श्याम सिंह यादव ने कहा कि वे राजनीति में इंज्वॉय कर रहे थे तो उन्हें इस चुनाव में अब पता चल जायेगा कि कौन इंज्वॉय कर रहा था। बीते 5 वर्षों में मैंने जिले की सभी विधानसभाओं में कार्यकर्ताओं के सुख दु:ख में शामिल रहा हूं और जब भी किसी को मेरी जरूरत पड़ी तो मैं हमेशा वहां मौजूद रहा लेकिन वर्तमान सांसद श्याम सिंह यादव ने उन कार्यकर्ताओं की भी सुध नहीं ली जिनकी बदौलत वे संसद में पहुंचे थे। यही नहीं, उन्होंने अपने 5 साल के कार्यकाल में किसी को अपना प्रतिनिधि नहीं बनाया जबकि हर सांसद या विधायक अपना प्रतिनिधि नियुक्त करता है। सांसद की गैर मौजूदगी में हमेशा प्रतिनिधि ही जनता की समस्याओं को निस्तारण करता है परंतु उन्होंने यहां इसकी भी नियुक्ति नहीं की थी।

श्री खान ने कहा कि 5 सालों तक मैंने न सांसद श्याम सिंह यादव की निधि का कोई ठेका लिया और न ही कोई लाभ। ऐसे में उनका यह कहना कि वे लोभ—लालच के चलते पार्टी छोड़ी है, सरासर गलत बयान है। किसी अन्य दल की सदस्यता ग्रहण करने पर सलीम ने कहा कि फिलहाल वे अपने लोगों के साथ चर्चा कर रहे हैं और जल्द ही कोई निर्णय लेंगे।


















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