लखनऊ: कालीन निर्यातकों ने सीएम से बताई भदोही की समस्याएं | #AAPKIUMMID - उम्मीद

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Friday, July 12, 2019

लखनऊ: कालीन निर्यातकों ने सीएम से बताई भदोही की समस्याएं | #AAPKIUMMID


  • कहा, मार्ट में हो फेयर, बढ़े इंफ्रास्ट्रक्चर, कम हो जीएसटी और जीआई का हो प्रचार प्रसार

सुरेश गांधी
लखनऊ। घपले घोटालो और विवादों में फंसी ‘भदोही मार्ट’ में इंडिया कारपेट एक्स्पों के आयोजन को लेकर छिड़ी जंग अब सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गयी है। शुक्रवार को भदोही से आएं अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री से बीस मिनट की वार्ता में पांच सदस्यीय एकमा के पदाधिकारियों ने भदोही में बने एक्स्पों मार्ट में कालीन मेले के आयोजन सहित जीआई को बढ़ावा देने, एक्सीलेंस जोन के तहत भदोही में इंफ्रास्ट्रक्चर का दायरा बढ़ाने और जीएसटी को कम करने व सरल बनाने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने लगे हाथ भदोही मार्ट से संबधित सचिव से वार्ता करने के बाद निर्यातकों को आश्वस्त किया कि वर्तमान हालात की समीक्षा के बाद भदोही मार्ट के अधूरे कार्यो को पूरा किया जायेगा। इसके निर्माण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जा चुका है। मार्ट निर्माण के पूरा होने पर फेयर लगाने के बाबत कुछ कहा जा सकता है। जहां तक भदोही में इंफ्रास्ट्रक्चर का सवाल है तो इसके लिए कार्य योजना तैयार है। जल्द ही उसे अमली जामा पहनाया जायेगा। खासकर अधूरे पड़े कार्यो को बरसात बाद युद्धस्तर पर लगकर पूरा कराया जायेगा। केन्द्र सरकार जीएसटी के बाबत उद्यमियों से लगातार वार्ता कर रही है और इसे सरल बनाया जा रहा है। जीआई की ब्रांडिंग में सरकार भरपूर सहयोग करेगी।

एकमा के पदाधिकारी आलोक बरनवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी सभी मांगों पर विस्तार से चर्चा की। उन्हें उम्मींद है कि उनकी सभी मांगों के प्रति मुख्यमंत्री प्राथमिकता देंगे। उनके साथ एकमाध्यक्ष ओंकारनाथ मिश्रा, अब्दुल हादी, शिवसागर तिवारी और पियुष बरनवाल थे। बता दें, दो सौ दस करोड़ की लागत से बनी भदोही मार्ट की बिलिं्डग विवादों में फंस गई है। मानक के अनुरुप काम न होने से यह बिल्डिंग पहली बारिश भी नहीं झेल पायी। उसके छत न सिर्फ टपकने लगे है, बल्कि दीवारें में भी रिसाव हो गया है। फर्श पर घूटनेभर जहां तहां पानी लग गया है। आरोप है कि तत्कालीन संचालक मंडल की मिलीभगत एवं कमीशनखोरी में ठेकेदार ने नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कराया है। साथ ही समय सीमा पूरा होने के बाद भी बिल्डिंग का निर्माण कार्य आधी अधूरी पड़ी है। बिजली व पानी कनेक्शन एवं फिनिशिंग का काम भी अपूर्ण है।
खास बात यह है कि तब से अब तब इसकी क्या स्थिति है, अफसरों ने इस बात का जायजा ही नहीं लिया है। राजधानी में बैठे अधिकारियों ने बिल्डिंग का अधिसूचना एवं टेंडर कराकर कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) को सौंप दिया है। लेकिन बिल्डिंग आधा अधूरा होने के चलते सीइपीसी को अभी हैंडओवर नहीं किया गया है। इस बाबत सीइपीसी अपनी कमेटी की विजिट रिपोर्ट में निर्माण कार्य पूर्ण न होने की बात कहकर शासन को कई बार पत्र भेजा। इसके बावजूद संबंधित विभाग व मंत्रालय बिल्डिंग काम पूरा नहीं करा पाई है। निर्यातकों का आरोप है कि जब बिल्डिंग अभी से चू बह रही है तो आगे क्या होगा। बिल्डिंग में फेयर लगाना या किसी आयोजन के लिए उसमें जाना जान जोखिम में डालने के बराबर है।

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