जौनपुर: बच्चों को उड़ान भरने के लिए स्वावलंबी बनाना जरूरी: माधुरी | #AAPKIUMMID - उम्मीद

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Saturday, May 25, 2019

जौनपुर: बच्चों को उड़ान भरने के लिए स्वावलंबी बनाना जरूरी: माधुरी | #AAPKIUMMID

सिकरारा, जौनपुर। मॉडल यूपीएस इब्राहिमाबाद सिकरारा जौनपुर की सहायक अध्यापिका माधुरी जायसवाल का मानना है कि बच्चों को हम संघर्षशील और स्वावलंबी बना सकते हैं ताकि वह उड़ान भरने को तैयार हों। बहुत से लोगों का कहना है पर कैसे? मुझे लगता है हम अध्यापकों को पहले बच्चों के कोमल मन तक पहुंचना होगा। उसके लिए हमें उनके साथ हर गतिविधि में शामिल होना होगा।जो अंतर उनके मन में हमारे और उनके बीच बसा है उसे मिटाना होगा।
कभी ध्यान दें कि जब भी हम उनसे कुछ कराते हैं तो क्या भाव होता है उनके चेहरे का और अगर उसमें हम खुद भी शरीक हों तब क्या होता है। मैंने इसे बहुत नजदीक से महसूस किया है। बहुत अंतर होता है उनके आत्मविश्वास में, उनकी खुशियों में और उनकी तन्मयता में। फिर पता ही नहीं चलेगा और वो आपके बेहद करीब होंगे। उनका विश्वास आश्चर्यजनक रूप से बढेगा और आपके लिए उनका सम्मान और लगाव भी। फिर यहीं से एक सफर का आरंभ होगा।
उनके साथ खेलकर, गतिविध करके प्रयोग करके शिक्षक के प्रति जो भय है दूर कर उनके मन तक पहुंचने का रास्ता अगर बन गया तो फिर बहुत सुखद परिणाम आते हैं। मैं बच्चों के साथ हर कार्यक्रम में पूरी तरह भाग लेती हूं। खेलती हूं, चार्ट पेपर पर काम करती हूं, प्रयोग में भी साथ काम करती हूं जिसका परिणाम ये हुआ कि वो हर वक्त अपनी हर बात मुझसे बताना पसंद करते हैं। इंटरवल में भी मुझे नहीं छोड़ते। हमें इन बच्चों को उड़ना सिखाना है तो पहले उनके पंखों को मजबूती देनी होगी और ये मानसिक रूप से उनसे जुड़ने पर ही संभव है। मैं उनके मन तक पहुंच कर बहुत कुछ पाई हूं। अथाह प्यार और सम्मान जो उनकी आंखों में और उनके बाल सुलभ व्यवहार में मुझे दिखता है उसने कई बार मेरे अन्तर्मन को छुआ। हर छोटी बड़ी परेशानी का हल वो बेझिझक मुझसे पूछते हैं। मैंने तन, मन और धन से इन बच्चों के लिए हमेशा कुछ न कुछ करने का प्रयास किया है और करती रहूंगी।
शिक्षक दिवस पर जब वो मुझे अपने हाथों से केक खिलाए और फिर खुद के हाथ से बना कार्ड दिया तो मुझे लगा शायद मैं इन बच्चों के गुरू होने का कुछ फर्ज अदा कर पाई हूं। इनकी छोटी छोटी हरकते अक्सर मेरे मन को छू जाती है क्योंकि मैं इनके मन को छू पाई हूं। अब इन बच्चों का ये स्नेह मुझे और भी बहुत कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देता है। कलाम सर जी ने सही कहा था कि बेहतरीन दिमाग क्लासरूम की आखिरी बेंच पर भी मिल सकता है। आगे भी हर मंच पर मैं हर जगह अपने बच्चों के लिए कुछ करती रहूंगी और उनके मन में उतरने का मेरा ये सफर यूं ही जारी रहेगा।




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