ललितपुर-झांसी लोकसभाः गठबंधन में लगा चन्द्रग्रहण | #AAPKIUMMID - उम्मीद

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Saturday, April 6, 2019

ललितपुर-झांसी लोकसभाः गठबंधन में लगा चन्द्रग्रहण | #AAPKIUMMID

जयेश बादल
पूरे उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी ने गठबंधन के अस्त्र से भाजपा का किला भेदने की तैयारी भले ही कर ली हो लेकिन बुन्देलखण्ड में उनके लिये राह आसान नहीं है। यहां सपा के सबसे कद्दावर नेता एवं सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी माने जाने वाले नेता चन्द्रपाल सिंह यादव नाराज हैं। चन्द्रपाल अभी राज्यसभा सांसद हैं लेकिन सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने इस बार उनका टिकट काट दिया है। टिकट उनके के घुर विरोधी माने जाने वाले श्याम सुन्दर सिंह यादव को मिला है जो इसके पहले भाजपा से चुनाव लड़ चुके हैं।

यही कारण है कि चन्द्रपाल ने चुनाव से दूरी बना ली है, क्योंकि उनकी संगठन पर गहरी पकड़ है, इसलिये उनकी नाराजगी गठबंधन प्रत्याशी के लिये ग्रहण साबित हो सकती है। उत्तर प्रदेश में भाजपा के बढ़ते प्रभाव से हैरान सत्ता के दो विपरीत ध्रुव अखिलेश व मायावती हाथ मिलाने पर मजबूर हो गये। बुआ-बबुआ की इस जोड़ी को उम्मीद है कि उनका गठबंधन उत्तर प्रदेश में भाजपा को लोकसभा चुनाव में शिकस्त देने के लिये प्रभावी होगा। जातिगत समीकरणों के लिहाज से यह तार्किक भी है लेकिन इसकी सफलता में स्थानीय पॉलिटिक्स के क्षत्रपों का भी कम योगदान नहीं होगा।
झांसी-ललितपुर लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के बड़े नेता चन्द्रपाल को टिकट न मिलने से उनका पूरा खेमा खफा है। चन्द्रपाल ने झांसी में सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी श्याम सुन्दर की राह को मुश्किल बना दिया है। इसके पीछे पुरानी राजनीतिक दुश्मनी है जिसके चलते चन्द्रपाल ने पूरे चुनाव से दूरी बनाकर अपनी नाराजगी का एहसास करा दिया है जिसकी शुरुआत खुद श्याम सुन्दर ने की थी। यह दुश्मनी इतनी गहरी है कि अखिलेश यादव के कहने के बाद भी चन्द्रपाल ने श्याम सुन्दर के समर्थन की बात नहीं मानी है।
यह है कारण
चन्द्रपाल व श्याम सुन्दर दोनों ही झांसी के पुराने नेता हैं। चन्द्रपाल ही सपा के वह नेता हैं जिन्होंने 2004 में पहली बार झांसी लोकसभा चुनाव में जीत दिलाकर सपा का खाता खोला था। इसके बाद 2009 में यहां कांग्रेस के प्रदीप जैन ने जीत दर्ज की जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में उमा भारती से चन्द्रपाल चुनाव हार गये लेकिन उन्होंने 3 लाख 80 हजार वोट हासिल कर पार्टी का जनाधार बनाये रखा। चन्द्रपाल के इन सभी चुनावों में श्याम सुन्दर उनके विरोध में ही रहे हैं। 2012 में हुये बबीना विधासभा चुनाव में चन्द्रपाल सपा प्रत्याशी थे तो श्याम सुन्दर भाजपा से चुनाव लड़कर चन्द्रपाल की हार का कारण बन गये थे। तब यहां से चन्द्रपाल 4 हजार वोटों से चुनाव हार गये थे। यहां बसपा चुनाव जीत गयी थी। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में श्याम सुन्दर चन्द्रपाल को हराने के लिये उमा भारती के साथ खड़े हो गये जो अपने मिशन में कामयाब भी रहे। अब दावा चन्द्रपाल का है। श्याम सुन्दर ने पाला बदलकर एक बार चन्द्रपाल का टिकट कटवाने में तो कामयाबी हासिल कर ली लेकिन चुनाव जीतना उनके लिये आसान नहीं है।
चन्द्रपाल खेमे के हैं ये सवाल
टिकट कटने के बाद चन्द्रपाल के खेमे ने अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाये हैं। बताते हैं कि खुद चन्द्रपाल ने अखिलेश यादव को अपनी नाराजगी के कारण गिना दिया है। उनका कहना था कि उन्होंने पार्टी को जमीन से मजबूत किया है। मुलायम सिंह यादव के साथ एक-एक बूथ तैयार कराया है। इसके कई चुनाव लड़े। वह जीते और हारे भी लेकिन जब गठबंधन में पार्टी को मजबूत बेस मिला है तो यह सीट भाजपा से दलबदल करके आये प्रत्याशी को दे दी गयी। फिलहाल चन्द्रपाल ने सपा के सभी कार्यक्रमों में जाना बंद कर दिया है। उनकी नाराजगी की खबरें आम हैं।

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