जिन्दगी झण्ड बा...फिर भी घमण्ड बा... | #AAPKIUMMID - उम्मीद

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Tuesday, March 26, 2019

जिन्दगी झण्ड बा...फिर भी घमण्ड बा... | #AAPKIUMMID

जिन्दगी भी गजब की होती है..........कुछ वर्ष पहले हमारे यहाँ एक आयोजन में भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन आए हुए थे, उन्होंने कहा था कि- जिन्दगी झण्ड बा फिर भी घमण्ड बा.........। आज जब इलेक्शन का मौसम चल रहा है तब जिन्दगी शब्द काफी याद आ रहा है। आये भी क्यों न........भाजपा ने कई बुजुर्ग नेताओं की बची-खुची जिन्दगी झण्ड कर दिया है, यानि उनकी उम्र की अधिकता को देखते हुए चुनाव लड़ने से मना कर दिया साथ ही टिकट भी नहीं दिया। वहीं समाजवादी पार्टी के बुजुर्ग एवं संस्थापक नेता जी अब भी चुनावी मैदान में ताल ठोंके खड़े हैं।
सोशल मीडिया की नित्य नियमित बदलती खबरों को देख सुनकर मन खिन्न हो जाता है। कब, कौन, कहाँ और किस पार्टी से चुनाव लड़ेगा यह समझ पाना मुश्किल हो गया है। सेलीब्रिटीज और ग्लैमर की दुनिया में चकाचौंध फैलाने वाली तारिकाओं की चुनाव लड़ने सम्बन्धी खबरें तो मुझ जैसों की जिन्दगी हलकान कर रहीं हैं।
उम्र पचपन, दिल बचपन.............मरहूम कादर खान साहब याद आने लगे। कांग्रेस जैसी वयोवृद्ध राजनैतिक पार्टी ने चुनावी भवसागर पार करने के लिए अपनी कश्ती का पतवार प्रियंका वाड्रा के हाथों में सौंप दिया है। कहना नहीं होगा कि इस युवा काँग्रेस स्टार ने युवाओं का मन मोह लिया है। वहीं दूसरी तरफ प्रियंका वाड्रा की वजह से कांग्रेसी मानसिकता के बुजुर्गवार लोगों की झण्ड हुई जिन्दगी में एक बार फिर से रौनक लौट आई सी दिख रही है।

अपने राम तो बस एक ही आस लगाए बैठे हैं कि कब हरियाणवी डांसर सपना चौधरी भी राजनीति में उतरें और हमें भी झण्ड हुई जिन्दगी संवारने का मौका मिले। बताइए कौन बेवकूफ होगा जो इन युवा तारिकाओं को छोड़कर किसी खूसट और घिसे-पिटे वयोवृद्ध नेता की तरफ देखे भी। हमने भी कड़ुवा तेल, लंगोटी अपने तखत के सिरहाने रख रखा है।
ड्रीम गर्ल........... स्वप्न सुन्दरी........... हेमा मालिनी के बारे में सुन रहा हूँ कि बीजेपी ने उन्हें मथुरा से एक बार फिर से अपना उम्मीदवार बनाया है। क्या बेवकूफी है........70प्लस में अब ग्लैमर कहाँ........? जया प्रदा के बारे में पता चला है कि उन्होंने भी बीजेपी ज्वाइन कर लिया। इसके पहले मौसमी चटर्जी भी भाजपा की सदस्यता ले चुकी हैं। माफी के साथ कहना चाहूँगा कि ये सभी फिल्मी तारिकाएँ टाइमबार्ड हो चुकी हैं। रही बात सपना की तो इस समय युवा दिलों की धड़कन बनी इस सेलीब्रिटी के बावत कुछ भी नहीं कहना। पता चला था कि प्रियंका वाड्रा की वजह से सपना ने कांग्रेस ज्वाइन किया था परन्तु खबर झूठी निकली पता लगा कि दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष भोजपुर सिने स्टार व सिंगर मनोज तिवारी ने सपना चौधरी को बीजेपी की तरफ खींच लिया.........। यह खबर कहाँ तक सही है ये सोशल मीडिया जाने............।
लोस चुनाव 2019 में हमने किसी के मुँह से कोई ऐसा भाषण नहीं सुना है जिसमें देश के विकास के लिए आवश्यक मुद्दे शामिल हों। चौकीदार..........चौकीदार..........हम भी चौकीदार..............चौकीदार चोर है..........चौकीदार प्योर है............इण्डिया का क्योर है.........पप्पू नादान है...........उसको कुछ नहीं आता...........इस तरह की आरोप-प्रत्यारोप जो सोशल मीडिया में छाये हुए हैं पढ़-देखकर खीझ होने लगी है। जिसकी जिन्दगी झण्ड न भी हुई हो यह सब पढ़-देख कर हो जाएगी।
पिछले महीने जब चुनाव की रणभेरी नहीं बजी थी तब केन्द्र की सरकार द्वारा लघु सीमान्त/सीमान्त किसानों को 6000 रूपए वार्षिक सहयोग किसान सम्मान निधि के रूप में दिए जाने की कवायद चल रही थी। अधिकांश किसान पहली किश्त 2000 रूपए की पाने में कामयाब भी रहे, ठीक उसी तर्ज पर अपने चुनावी भाषण में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने देश के 20 प्रतिशत अति गरीब लोगों को सालाना 72 हजार रूपए दिए जाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि यदि केन्द्र में कांग्रेस की सरकार बनी तो गरीब परिवार की महिलाओं के खाते में 600 रूपए प्रतिमाह की दर से भेजा जाएगा। यह तो रही पी.एम. मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की बातें.......।
बीते महीनों में देश की केन्द्र सरकार और फौज द्वारा कई ऐसे कार्य किए गए जो काफी दिनों तक चर्चा का विषय बने रहे। जैसे सर्जिकल स्ट्राइक, एअर स्ट्राइक.........। पाकिस्तान धरती पर स्थापित खतरनाक आतंकी ठिकानों पर बमबारी की घटना अभी भी चर्चा में है। सरकार विरोधियों को इसका पुख्ता सबूत चाहिए। सोशल मीडिया में अब भी बहस जारी है। इसके अलावा रक्षा सौदों व खरीद में कथित कमीशनखोरी भी काफी चर्चा में रही।
विजय माल्या, नीरव मोदी के पूर्व जीएसटी व नोटबन्दी ने मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करने के लिए विपक्षियों व विरोधियों का भरपूर सहयोग दिया। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, बुलेट ट्रेन ने मोदी सरकार को घेरने में काफी मदद की।
चुनावी मौसम चल रहा है। हवलदिल, विक्षिप्त से लेकर चोर उचक्कों, महिलाओं और ट्रान्सजेण्डर्स तक ने चुनावी मैदान में उतर कर एक दूसरे से ताल ठोंक कर दो-दो हाथ करने का मन बना लिया है। जीन्स पहनने वाले धोती कुर्ता, साड़ी, ब्लाउज, पेटीकोट में लिपटे हुए रोड शो करने लगे हैं। मुद्दे की कोई बात नहीं.......आरोप-प्रत्यारोप भाषणों में............अमीर और गरीब परखने व तदनुसार चुनावी वायदे कर सब्जबाग दिखाकर मतदाताओं को बेवकूफ बनाने की मुहिम जारी..............। राजेश खन्ना अभिनीत पुरानी फिल्म रोटी का वह गाना- ये पब्लिक है सब जानती है.....पब्लिक है..........।
एक तरफ हमें लालकृष्ण आडवाणी का झण्ड हुआ बुढ़ापा तो दूसरी तरफ मुलायम सिंह साहब की लौटती जवानी की याद आ रही है। काश! मोदी, शाह और बीजेपी के अन्य दिग्गज आडवाणी साहब के नजदीकी रिश्तेदार होते तो शायद उन्हें भी यह दिन न देखना पड़ता कि उनका टिकट गांधीनगर लोकसभा से ही कट जाए। भला हो लायक बेटे अखिलेश का जिसने बुआ और बबुआ के महागठबन्धन के बावजूद अपने बूढ़े पिता मुलायम सिंह यादव को चुनावी मैदान में उतरने की आजादी दी है।
फिलहाल...............क्या कुछ लिखा जाए........क्या न लिखा जाए........समझ से परे है। राजनीति के पारम्परिक सौदागरों की दुकानें सज गई हैं। लाखों/करोड़ों का वारा-न्यारा होने लगा है। जातिवाद, सम्प्रदायवाद, वंश व परिवार वाद हावी है। आम आदमी वही जो मतदाता है, जिसकी जिन्दगी झण्ड है फिर भी इस चुनाव के वक्त मतदाता के रूप में उसको भी घमण्ड है।
-भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी
9454908400




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