जौनपुर: पति पत्नी और बेटे की मौत से घर में मातमी सन्नाटा | #AAPKIUMMID - उम्मीद

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Saturday, March 9, 2019

जौनपुर: पति पत्नी और बेटे की मौत से घर में मातमी सन्नाटा | #AAPKIUMMID

जौनपुर। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर शनिवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में पति पत्नी और बेटी की मौत से घर में मातमी सन्नाटा है। शनिवार की शाम तक घर के पुरुषों ने मौत की भनक महिलाओं के कान तक नहीं पहुंचने दी थी। घर की महिलाओं को बस इतना पता है कि परिवार के सदस्य सड़क हादसे में घायल हुए हैं। हादसे की खबर लगते ही शहर के तारापुर कालोनी स्थित सेक्टर संख्या आठ में स्थित अरुण कुमार सिन्हां के मकान पर उनके नात रिश्तेदार और आस पास के लोग भी पहुंचने लगे। लेकिन जब लोगों को यह पता चला कि महिलाएं इस हादसे से बेखबर हैं तो लोग घर के बाहर से ही लौटते रहे।

जिले के मछलीशहर के खौरहा गांव के मूल निवासी अरुण कुमार सिन्हा का शहर के तारापुर कालोनी में सेक्टर संख्या आठ में भी मकान है। यहां उनके छोटे भाई अनूप सिंह और उनकी माता सावित्री देवी के अलावा परिवार के अन्य सदस्य भी रहते हैं। अरुण सिन्हा (५९) उद्योग विभाग में एकाउंटेंट थे। मौजूदा समय में उनकी तैनाती मिर्जापुर में थी। वह अपनी पत्नी, बेटे और बेटी के साथ टूरपर जयपुर गए थे। वहां से लौटते वक्त शनिवार को सुबह आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे पर इटावा जिले में उनकी कार ट्रक से टकरा गई। जिससे कार में सवार अरुण सिन्हा (५९), उनकी पत्नी रेखा सिन्हा (५६) और पुत्र अमित सिन्हा (२६) की मौत हो गई। जबकि बेटी श्वेता (२४) घायल हो गई। हादसे में सिन्हा के कार चालक रवीन्द्र विश्वकर्मा पुत्र जियतराम निवासी वेलवरिया मुरदाह वाराणसी की भी मौत हुई है।
घटना की खबर लगते ही परिवार के कुछ सदस्य मौके के लिए रवाना हो गए। तीनों के शव रविवार को सुबह तक घर पहुंचने की संभावना है। अरुण सिन्हा अपने चार भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके दूसरे भाई अनूप सिन्हा करंजाकला ब्लाक कार्यालय में एकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं। तीसरे नंबर के भाई संजय सिंह बलिया में डीडीओ कार्यालय में तैनात हैं जबकि सबसे छोटे भाई मछलीशहर में ग्राम पंचायत अधिकारी हैं। उनके पिता ललित सिन्हा की पहले ही मौत हो चुकी है जबकि ८० वर्षीय माता सावित्री देवी शहर वाले मकान पर रहती हैं।
अरुण सिन्हा की दो बहने रपश्मि सिन्हा और पुष्पा सिन्हा हैं। जो हादसे की खबर मिलते ही भाई के घर पहुंच गई हैं। हालांकि माता सावित्री के साथ साथ इन बहनों को भी मौत की खबर से दूर रखा गया है। घर पर आने जाने वाले लोग दबी जुबान से यही चर्चा करते रहे कि सुबह जब एक साथ तीन शव पहुंचेंगा को बुजुर्ग सावित्री को कैसे संभाला जाएगा।




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