गुजरात: प्रदेश अध्यक्ष प्रेमचंद्र यादव ने राज्यपाल से की मुलाकात, बेरोजगारी की दयनीय​ स्थिति पर किया चर्चा | #AAPKIUMMID - उम्मीद

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Tuesday, November 13, 2018

गुजरात: प्रदेश अध्यक्ष प्रेमचंद्र यादव ने राज्यपाल से की मुलाकात, बेरोजगारी की दयनीय​ स्थिति पर किया चर्चा | #AAPKIUMMID

  • प्राइवेट सेक्टर में सबसे ज्यादा कर्मचारियों का हो रहा शोषण: प्रेमचंद्र यादव

बड़ोदरा, गुजरात। इंडियन मानवाधिकारी एसोसिएशन गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष प्रेमचंद्र ​यादव ने राज्यपाल ओ.पी. कोहली से ​मुलाकात कर गुजरात राज्य सहित समस्त देश में बेरोजगारी की दयनीय​ स्थिति पर चर्चा किया।
प्रदेश अध्यक्ष प्रेमचंद्र यादव ने कहा है कि गुजरात और देश के समस्त राज्यों में युवक युवतियों में बेरोजगारी की दयनीय स्थिति है। युवक और युवती कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। प्राइवेट सेक्टर में जी.आई.डी.सी. और मोल एवं दुकानों पर कर्मचारियों से 10 से 12 घंटे प्रतिदिन काम करवाया जाता है। उन्हें मासिक वेतन नहीं देते हैं और इनका शोषण कर रहे हैं। इसके अलावा सफाई कर्मचारियों का भी शोषण हो रहा है। उन्होंने सफाई कर्मचारियों को सरकारी किया जाए। 

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, ओ.बी.सी. का आजादी के 70 साल पूरे होने के बाद भी आरक्षण पूरा नहीं हुआ। पुलिस कर्मचारियों का भी शोषण हो रहा है। इन्हें दोगुनी ड्यूटी करनी पड़ती है। इसका असर इनके परिवारवालों पर भी पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई लिखाई भी सुचारू ढंग से नहीं हो पाती है। 
उन्होंने कहा कि भारत के वीर सैनिक जवान जिनके कंधों पर देश की सुरक्षा का दायित्व है, उनका भी शोषण हो रहा है। इन्हें भी उचित वेतन और सम्मान नहीं मिल रहा है। उन्होंने सरकार इस पर भी ठोस कदम उठाने की मांग किया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में किसानों के लिए सरकार ने कोई भी आ​र्थिक नीति नहीं बनाई है। अकाल पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है। किसान, सैनिक, युवा और मजदूर देश की नींव हैं। अगर नींव ही हिलने लगेगा तो पूरा देश हिलने लगेगा। 
आप की उम्मीद डॉट कॉम से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि असंगठित श्रमिकों से संबंधित मजदूरी और रोजगार नीतियां और विशेष रूप से उनको दिए गए न्यूनतम मजदूरी का मुद्दा सामान्यतया यूनियन नेताओं और श्रम विशेषज्ञों के बीच काफी चर्चा का विषय रहा है। जबकि न्यूनतय मजदूरी कानून को बड़े पैमाने पर सं​गठित में श्रमिकों को सुरक्षा प्रदान करने में प्रभावी रहा है। समय समय पर संशोधन के साथ असं​गठित श्रमिकों के साथ ऐसा मामला नहीं है, जो न्यूनतम मजदूरी कानून के दायरे से बाहर रहते हैं। न्यूनतम मजदूरी मालिकों द्वारा मजदूरों को नहीं दी जाती। अत: उनके शोषण के विरूद्ध कठोर नियम बनाकर, उसका पालन कराया जाए। उन्होंने सरकार से मांग किया कि उक्त विषय को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई करें जिससे आमजन को उचित न्याय मिल सके। इस अवसर पर विनेश सनसेटा, गिरजाशंकर चतुर्वेदी, डा. सतीश गुप्ता, रौजी भाई, जे.के. छैया, निमिता भगता, संतोष झा, दिनेश शर्मा, संजय शर्मा आदि उपस्थित रहे।





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